Ek panchi ke dard ka fasana…


एक पंछी के दर्द का फसाना था,
टूटे थे पंख मगर उड़ते हुए जाना था,
तूफ़ान तो झेल गया वो,
पर हुआ एक अफ़सोस वही डाल टूटी,
जिस पर उसका आशियाना था।