Dost purane mere…


अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे..!!

Ek panchi ke dard ka fasana…


एक पंछी के दर्द का फसाना था,
टूटे थे पंख मगर उड़ते हुए जाना था,
तूफ़ान तो झेल गया वो,
पर हुआ एक अफ़सोस वही डाल टूटी,
जिस पर उसका आशियाना था।