जुगनू कितना भी चमके…

जुगनू कितना भी चमके ? आफ़ताब नहीं होता,
बंद आंखों ? से जो देखे पूरा वो ख़्वाब नहीं होता,
अगर दुनियां की हर दौलत मां ? के क़दमों में रख दूं,
फिर भी उसकी लोरियों का हिसाब ? नहीं होता..!!

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